अपनी शक्ति को जगाये ।
बहुत कम व्यक्ति यह समाज पाते है कि निर्धनता पहले मन मे उपजाति है । मानसिक विचार ही शरीर तक पहुचते है । पहले हम मन मे निर्धन होते है , भौतिक रूप में बाद में । इसका कारण यह है कि जैसी हमारी मनोदशा होती है , हम अनायास उसी कार्य कीओर बढ़ते है ।
आपको चाहिए कि स्वभाव में निर्धनता को निकाल दे । अभावो से गुजारा कारण छोड़े । जीवन की कुछ जरूरी आवस्यकता होती है ,उनके बिना दिन काटने की विचार के छोड़ दे . दिन-हीन बनकर न रहे । यह प्रकृति का नियम है , इससे कोई परिवर्तन हो ही नही सकता कि आप जिन चीजों के बारे में सोचेंगे , वही चीजे आप की ओर आकृष्ट होगी । आप जिन जिन वस्तुओं का चिंतन करते है , वही वस्तुए आप को मिलाती है । यदि आप निर्धनता की की आशंका से दबते है , उसी के संबंद में सोचते है , तो स्वयं निर्धनता ही आप के द्वार पर आ खड़ी होगी।
यदि आप सम्पनता ऐश्वर्य और समृद्धि व सिद्धि के बारे में सोचेंगे , तो लक्ष्मी आप के द्वार पर दस्तक देगी , ऐश्वर्य आप को प्राप्त होगा ।
अपने गुण को बढ़ाये
क्या आप ने कभी आंतरिक गुनरूपी पूंजी को किसी लाभकारी काम मे लगाने का प्रयत्न किया ? लाभ तो आप पूंजी लग कर ही ले सकते है ।अपने व्यक्तितित्व को गौरव से युक्त बनाये । आप मे जो गुण है उन्हें ओर बढ़ाये ओर उभारिये । अपने जीवन के लिए एक निश्चित कार्यक्रम बनाये रयोजना अनुसार कार्य कीजिये । इससे आप की निष्क्रिय सक्तिया सक्रिय हो उठेगी , सोई प्रतिभा जग उठेगी ।
संसार मे अधिकृत ऐसे व्यक्ति है , जो किसी चमत्कार्य जादू की प्रतीक्षा करते है , लेकिन ऐसा कोई भी अलादीन का चिराग नही है , जो शक्ति की पूंजी लगाए बिना मन की इक्छाये पूर्ण कर दे । आत्म प्रेणा के विकसित होते ही शक्तियों के अखंड स्त्रोत खुल जाते है ।
यदि माता पिता से आप को वीरा सैट में कुछ नही मिला तो , इसमे अपने को हीन समझने की क्या बात है ? आप यह क्यो सोचरत्ते है कि आप को उस परमपिता परमात्मा से उत्तराधिकार क्यो नही मिला ? वो तो सर्वज्ञ ओर सर्व शक्ति मान है । उसने आप को सोचने कीशक्ति दी है और इस विसहल विश्व की रचना करके इसे आप के लिए छोड़ दिया है । जब आप यह सोच लेंगे तो आप मे अभूत पूर्व शक्ति का संचार होने लगेगा

