आप के लिए लाए है विश्व के महान वैज्ञानिक
गैलीलियो गैलिली के बारे मे......
इटली के गैलीलियो गैलिली विश्व के उन महान वेज्ञानिको में से एक थे, जिन्होंने अपने बनाये हुआ दूरदर्शी यंत्र स सर्वप्रथम खगोलीय पिंडों के विषय मे महत्व पूर्ण खोज की । उन्होंने इस दूरदर्शी से चन्द्र मा के परत एवं घटिया , बृहस्पति के उपग्रहों तहत सनी के वलयो को देखा । गेलिलियो ने ऐसी यंत्र के आधार पर आकाश गंगा को दूरवर्ती तारो का समहू बताया ।
गेलिलियो का जन्म 15 फरवरी , सन 1564 को पीस (इटली ) में हुआ था ।23 वर्ष की उम्र में गेलिलियो पिसा विश्वविद्यलय मर गणित कर प्राध्यापक पैड पर नियुक्त किये गए ।सन 1581 में उन्होंने दोलक (pendulam) का अविष्कार किया ।ऐसी के आसार पर उनके पुत्र नई दीवाल घड़ियों के मॉडल बनाये। बेरामिटर का निर्माण और प्रथम एस्टिम इंजन का विकाश की इन्ही के खोजो के आधार पर हुआ ।
उनका जन्म ऐसे समय मे हुआ था जब , पृथ्वी और ब्रह्मण्ड को बाइबल ओर अरस्तु के विचारों के आधार पर समझाया जाता था और पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता था । उन्होंने सेकड़ो वृष से प्रचलित धार्मिक कथनों को वैज्ञानिक कथनों के आधार पर गलत सिद्ध किया उन्होंने बताया कि सूर्य ब्रमण्ड का केंद है और पृथ्वी सूर्य के चारो ओर घूमती है ।पिसा की झुकी मीनार से धातु के दो गोल्ड गिरा कर गेलिलियो ने अरस्तु के इस कथन को गलत शिद्ध कर दिया कि समान उचाई से अलग अलग भर की दो वस्तुए एक ही साथ गिराई जाए तो अधिक भर की वस्तु काम भर की तुलना में जमीन पर पहले गिरेगी । उन्होंने ये भी बताया कि9ई दूसरे शभी हरः सूर्य कर के छर्रो ओर घूमते है ।
ऐसी धार्मिक मानयता को गलत सिद्ध करने के अपराध में उन्हें जेल मे डाल दिया गया । जेल से छूटने के बाद गेलिलियो अंधे हो गए और 8 जनवरी 1642 को आर्सेनी (इटली)में उनकी मृत्यु हो गयी ।
उनकी प्रसिद्ध पुस्तक " डायलॉग्स कॉन्सेर्निंग दी टू प्रिंसिपल ऑफ दी वर्ल्ड " ( dialogues concerning the two principal systeme ऑफ the world ) में उन्होंने अपने वेघ्यनिक विचारों को विस्तार पूर्वक उल्लेख किया है । गेलिलियो जैसे महान वैज्ञानिक ने ही मानव को अंतरिक्ष अनोशनदानो की राह दिखाई थी वे ऐसे वैज्ञानिक थे जो जीवन भर सत्य की खोज में लगे रहे ।


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