Monday, July 5, 2021

अपनी शक्ति कैसे जागृत करे ,मन को शान्त कैसे करे ?

 


अपनी शक्ति को जगाये । 

                                                      बहुत कम व्यक्ति यह समाज पाते है कि निर्धनता पहले मन मे उपजाति है । मानसिक विचार ही शरीर तक पहुचते है । पहले हम मन मे निर्धन होते है , भौतिक रूप में बाद में । इसका कारण यह है कि जैसी हमारी मनोदशा होती है , हम अनायास उसी कार्य कीओर बढ़ते है । 
                आपको चाहिए कि स्वभाव में निर्धनता को निकाल दे । अभावो से गुजारा कारण छोड़े । जीवन की कुछ जरूरी आवस्यकता होती है ,उनके बिना दिन काटने की विचार के छोड़ दे . दिन-हीन बनकर न रहे । यह प्रकृति का नियम है , इससे कोई परिवर्तन हो ही नही सकता कि आप जिन चीजों के बारे में सोचेंगे , वही चीजे आप की ओर आकृष्ट होगी । आप जिन जिन वस्तुओं का चिंतन करते है , वही वस्तुए आप को मिलाती है । यदि आप निर्धनता की की आशंका से दबते है , उसी के संबंद में सोचते है , तो स्वयं निर्धनता ही आप के द्वार पर आ खड़ी होगी।
 यदि आप सम्पनता  ऐश्वर्य और समृद्धि  व सिद्धि के बारे में सोचेंगे , तो लक्ष्मी आप के द्वार पर दस्तक देगी , ऐश्वर्य आप को प्राप्त होगा ।

                                       

अपने गुण को बढ़ाये 

                                           क्या आप ने कभी आंतरिक गुनरूपी पूंजी को किसी लाभकारी काम मे  लगाने का प्रयत्न किया ? लाभ तो आप पूंजी लग कर ही ले सकते है  ।अपने व्यक्तितित्व को गौरव से युक्त बनाये । आप मे जो गुण है उन्हें ओर बढ़ाये ओर उभारिये । अपने जीवन के लिए एक निश्चित कार्यक्रम बनाये रयोजना अनुसार कार्य कीजिये । इससे आप की निष्क्रिय सक्तिया सक्रिय हो उठेगी , सोई प्रतिभा जग उठेगी ।
                        संसार मे अधिकृत ऐसे व्यक्ति है , जो किसी चमत्कार्य जादू की प्रतीक्षा करते है , लेकिन ऐसा कोई भी अलादीन का चिराग नही है , जो शक्ति की पूंजी लगाए बिना मन की इक्छाये पूर्ण कर दे । आत्म प्रेणा के विकसित होते ही शक्तियों के अखंड स्त्रोत खुल जाते है । 
यदि माता पिता से आप को वीरा सैट में कुछ नही मिला तो , इसमे अपने को हीन समझने की क्या बात है  ? आप यह क्यो सोचरत्ते है कि आप को उस परमपिता परमात्मा से उत्तराधिकार क्यो नही मिला  ? वो तो सर्वज्ञ ओर सर्व शक्ति मान है । उसने आप को सोचने कीशक्ति दी है और इस विसहल विश्व की रचना करके इसे आप के लिए छोड़ दिया है । जब आप यह सोच लेंगे तो आप मे अभूत पूर्व शक्ति का संचार होने लगेगा 

Sunday, June 6, 2021

sir isaac newton (1642-1727) सर आइजक न्यूटन

 देश के महान वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन के बारे मेें.....

न्यूटन अपने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है , जो उन्होंने सेब को पेड़ से नीचे गिरते देख प्रति पादित किया किया था । सर आइजक न्यूटन का जन्म वुलस्थरपे, lincoinshireमें सन्न 23 दिसंबर 1642 को हुआ था । वे विश्व के महानतम वैज्ञानिको में से एक थे उन्हें भौतिक का जन्म दाता कहा जाता है बचपन  में न्यूटन कोई प्रतिभाशाली छात्र नही  थे ।केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उन्होंने सत्र 1665 में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की सत्र 1667 में ट्रिनिटी कॉलेज में गणित के प्रोफ़ेसर पद पर नियुक्त किये गए।





           सत्र 1672 में उन्हें रॉयल सोसाइटी ऑफ  लंदन के फेलो चुना गया । न्यूटन 1689 में पार्लियामेंट के सदस्य चुने गए और सत्र 1705 में उन्हें रॉयल सोसायटी का अध्यक्ष बनाया गया । सत्र 1705 में महारानी ऐन ने उन्हें सर की उपाधि से सम्मानित किया ।

न्यूटन ने गुरुत्वाकरसँ का सिद्धांत (theory of gravitation) ओर गति के तीन नियम (three laws of motion) प्रतिपादित किये ।जो आज भी भौतिकी का आधार मने जाते है । और विद्यार्थियों को पढ़ाई जाते है ।न्यूटन ने सिद्ध किया कि सूर्य का सफेद प्रकास सात रंगों लाल , संतरी , पिला, हरा , आसमानी , बैंगनी से मिलकर बना है । एक परिश्रमी की सहायता के उन्होंने सात रंगों को जोड़ कर बताया । न्यूटन दुवारा डिस्क को घुमाने से सात रंग सफेद रंग में बदल जाते है उन्होंने सात रंगों को दसरे प्रिज्म दुवारा मिलाकर फिर से सफेद रंग में बदला । उन्होंने अपने दूसरे अविष्कारों को प्रिंसिपियो नामक पुस्तक में छपवाया । न्यूटन गणित में कैल्कुलम कई भी नीव डाली । 

              वृद्धवास्त में न्यूटन ने खगोलीय पिंडों पर भी कार्य किया विज्ञान की सेवा करते हुए सत्र 20 मार्च 1727 को को 85 वर की आयु में उनका लंदन में देहांत हो गया । आज भी न्यूटन को विश्व के महानतम वेज्ञानिको में से गिना जाता है ।

Thursday, June 3, 2021

(Galileo Galilei ) 1564-1642 गैलीलियो गैलिली

 आप के लिए लाए है विश्व के महान वैज्ञानिक  
 गैलीलियो गैलिली के बारे मे......


















इटली के गैलीलियो गैलिली विश्व के उन महान वेज्ञानिको में से एक थे, जिन्होंने अपने बनाये हुआ दूरदर्शी यंत्र स सर्वप्रथम खगोलीय पिंडों के विषय मे महत्व पूर्ण खोज की । उन्होंने इस दूरदर्शी से चन्द्र मा के परत एवं घटिया , बृहस्पति के उपग्रहों तहत सनी के वलयो को देखा । गेलिलियो ने ऐसी यंत्र के आधार पर आकाश गंगा को  दूरवर्ती तारो का समहू बताया ।

    गेलिलियो का जन्म 15 फरवरी , सन 1564 को पीस (इटली ) में हुआ था ।23 वर्ष की उम्र में गेलिलियो पिसा विश्वविद्यलय मर गणित कर प्राध्यापक पैड पर नियुक्त किये गए ।सन 1581 में उन्होंने दोलक (pendulam) का अविष्कार किया ।ऐसी के आसार पर उनके पुत्र नई दीवाल घड़ियों के मॉडल बनाये।  बेरामिटर का निर्माण और प्रथम एस्टिम इंजन का विकाश की इन्ही के खोजो के आधार पर हुआ ।
 उनका जन्म ऐसे समय मे हुआ था जब , पृथ्वी और ब्रह्मण्ड को बाइबल ओर अरस्तु  के विचारों के आधार पर समझाया  जाता था और पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता था ।                उन्होंने सेकड़ो वृष से प्रचलित धार्मिक कथनों को वैज्ञानिक कथनों के आधार पर गलत सिद्ध किया उन्होंने बताया कि सूर्य ब्रमण्ड का केंद है और पृथ्वी सूर्य के चारो ओर घूमती है ।पिसा की झुकी मीनार से धातु के दो गोल्ड गिरा कर गेलिलियो ने अरस्तु के इस कथन को गलत शिद्ध कर दिया कि समान उचाई से अलग अलग भर की दो वस्तुए एक ही साथ गिराई जाए तो अधिक भर की वस्तु काम भर की तुलना में जमीन पर पहले गिरेगी । उन्होंने ये भी बताया कि9ई दूसरे शभी हरः सूर्य कर के छर्रो ओर घूमते है ।

              ऐसी धार्मिक मानयता को गलत सिद्ध करने के अपराध में उन्हें जेल मे डाल  दिया गया । जेल से छूटने के बाद गेलिलियो अंधे हो गए और 8 जनवरी 1642 को आर्सेनी (इटली)में उनकी मृत्यु हो गयी ।

 उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "  डायलॉग्स कॉन्सेर्निंग दी टू प्रिंसिपल ऑफ दी वर्ल्ड " ( dialogues concerning the two principal systeme ऑफ the world ) में उन्होंने अपने वेघ्यनिक विचारों को विस्तार पूर्वक उल्लेख किया है । गेलिलियो जैसे महान वैज्ञानिक  ने ही मानव को अंतरिक्ष अनोशनदानो की राह दिखाई थी वे ऐसे  वैज्ञानिक थे जो जीवन भर सत्य की खोज में लगे रहे । 

Tuesday, June 1, 2021

🇮🇳🇮🇳Bhagat Singh🇮🇳🇮🇳by shubh

 Jai hind frnds 🇮🇳🇮🇳 

आप मेर ब्लॉग में उन सभी जवानों  के बारे में जानेगे जिन्होंने देश की सेवा में अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया  
 
तो जानते है ऐसे वीर भगत के बारे में ........

भगत सिंह 🇮🇳🇮🇳🇮🇳.....


full name                      भगत सिंह 
born                               27/09/1907
natinality                       indian
gender                             male
parents                            पिता: किसन सिंह 
                                           माता : विद्यामती
भगत सिंह को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सबसे बड़े प्रभावसील क्रांतिकारी में माना जाता है वो कई क्रांतिकारी संघटनों के साथ मील ओर भारतीय आंदोलन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया  भगत सिंह की मृत्यु 23 वर्ष में हो गयी थी जब उन्हें ब्रिटिश सरकार  ने फांसी पर चड़ा दिया था 
भगत सिंह का जन्मे 1907  सितंबर 27 को लायलपुल जिले कले बंगा में हुआ था , जो अब पाकिस्तान में है उनको पैतृक गांव खटकड़ कला है जो पंजाब भारत मे है उनके जन्मे के समय उनके पिता किसन सिंह 

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अपनी शक्ति कैसे जागृत करे ,मन को शान्त कैसे करे ?

  अपनी शक्ति को जगाये ।                                                        बहुत कम व्यक्ति यह समाज पाते है कि निर्धनता पहले मन मे उपजाति...